Makar Sankranti

India • January 14, 2026 • Wednesday

11
Days
18
Hours
06
Mins
52
Secs
until Makar Sankranti
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Makar Sankranti
Country
India
Date
January 14, 2026
Day of Week
Wednesday
Status
11 days away
About this Holiday
Makar Sankranti is a restricted holiday in India

About Makar Sankranti

Also known as: मकर संक्रांति

मकर संक्रांति: भारतीय संस्कृति और सूर्य उपासना का महापर्व

मकर संक्रांति भारत के सबसे महत्वपूर्ण और प्राचीन हिंदू त्योहारों में से एक है। यह पर्व केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह खगोलीय घटनाओं, कृषि चक्र और सांस्कृतिक एकता का एक अद्भुत संगम है। जब सूर्य धनु राशि से निकलकर मकर राशि में प्रवेश करता है, तो इस संक्रमण काल को 'मकर संक्रांति' कहा जाता है। भारतीय संस्कृति में 'संक्रांति' का अर्थ है 'परिवर्तन' या 'आगे बढ़ना'। यह त्योहार सर्दियों के अंत और वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। जैसे ही सूर्य उत्तर दिशा की ओर अपनी यात्रा शुरू करता है, जिसे 'उत्तरायण' कहा जाता है, दिन लंबे होने लगते हैं और रातें छोटी होने लगती हैं। यह प्रकाश की अंधकार पर विजय और नई ऊर्जा के संचार का समय है।

इस त्योहार की विशेषता यह है कि यह भारत के लगभग हर कोने में मनाया जाता है, भले ही इसके नाम और मनाने के तरीके अलग-अलग हों। यह त्योहार प्रकृति के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करने का अवसर है। किसान अपनी फसल कटाई की खुशी मनाते हैं, लोग पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और सूर्य देव की पूजा करते हैं। आध्यात्मिक रूप से, यह समय आत्म-शुद्धि और नई शुरुआत के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। मकर संक्रांति का महत्व ऋग्वेद के गायत्री मंत्र से लेकर पुराणों की कथाओं तक फैला हुआ है, जो इसे भारतीय जीवन पद्धति का एक अभिन्न हिस्सा बनाता है।

मकर संक्रांति का सामाजिक पहलू भी बहुत गहरा है। यह पर्व लोगों को जोड़ने का काम करता है। 'तिल-गुड़' बांटना और मीठे पकवान बनाना इस बात का प्रतीक है कि हमें अपने रिश्तों में मिठास बनाए रखनी चाहिए। पतंगबाजी की परंपरा आकाश की असीमित संभावनाओं और स्वतंत्रता का संदेश देती है। भारत जैसे कृषि प्रधान देश में, यह पर्व मिट्टी, पानी, धूप और पशुधन के प्रति सम्मान प्रकट करने का माध्यम है।

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति की तिथि और समय

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति का पर्व Wednesday, January 14, 2026 को मनाया जाएगा। खगोलीय गणना के अनुसार, सूर्य January 14, 2026 को दोपहर लगभग 2:49 बजे (IST) मकर राशि में प्रवेश करेगा। आज से इस पावन पर्व के आगमन में केवल 11 दिन शेष हैं।

आमतौर पर मकर संक्रांति हर साल 14 या 15 जनवरी को ही पड़ती है क्योंकि यह चंद्र कैलेंडर के बजाय सौर कैलेंडर पर आधारित है। यह उन दुर्लभ हिंदू त्योहारों में से एक है जिसकी तिथि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार लगभग निश्चित रहती है।

2026 के लिए विशेष शुभ मुहूर्त इस प्रकार हैं: पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 6:21 बजे तक। इस दौरान दान-पुण्य और पूजा करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। महा पुण्य काल: दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:04 बजे तक। यह समय विशेष अनुष्ठानों और पवित्र स्नान के लिए सर्वश्रेष्ठ माना गया है।

ऐतिहासिक और आध्यात्मिक पृष्ठभूमि

मकर संक्रांति का इतिहास और इसकी उत्पत्ति अत्यंत प्राचीन है। वेदों और पुराणों में सूर्य को 'जगत की आत्मा' और 'ऊर्जा का स्रोत' माना गया है।

उत्तरायण का महत्व

हिंदू धर्मग्रंथों के अनुसार, उत्तरायण को 'देवताओं का दिन' कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि उत्तरायण के दौरान शरीर त्यागने वाले व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है और उसे पुनर्जन्म के चक्र से मुक्ति मिल जाती है। महाभारत की कथा के अनुसार, भीष्म पितामह ने बाणों की शय्या पर लेटे होने के बावजूद अपनी मृत्यु के लिए उत्तरायण के सूर्य का इंतजार किया था। उन्होंने अपनी इच्छाशक्ति से प्राण तब तक रोके रखे जब तक कि सूर्य ने मकर राशि में प्रवेश नहीं कर लिया।

पौराणिक कथाएं

एक अन्य प्रचलित कथा के अनुसार, मकर संक्रांति के दिन ही भगवान सूर्य अपने पुत्र 'शनि' के घर जाते हैं। चूंकि शनि मकर राशि के स्वामी हैं, इसलिए इस दिन को पिता और पुत्र के पुनर्मिलन के प्रतीक के रूप में भी देखा जाता है। यह समय आपसी मतभेदों को भुलाकर प्रेम और भाईचारे को बढ़ाने का संदेश देता है।

इसके अलावा, यह भी माना जाता है कि इसी दिन देवी गंगा स्वर्ग से पृथ्वी पर उतरकर महाराज भगीरथ के पूर्वजों का उद्धार करने के बाद कपिल मुनि के आश्रम से होते हुए गंगासागर में मिली थीं। यही कारण है कि पश्चिम बंगाल के गंगासागर में इस दिन विशाल मेला लगता है और लाखों श्रद्धालु स्नान के लिए एकत्र होते हैं।

भारत के विभिन्न राज्यों में क्षेत्रीय विविधता

भारत की विविधता मकर संक्रांति के उत्सव में स्पष्ट रूप से दिखाई देती है। उत्तर से दक्षिण और पूर्व से पश्चिम तक, यह त्योहार अलग-अलग नामों और परंपराओं के साथ मनाया जाता है:

1. पोंगल (तमिलनाडु)

दक्षिण भारत, विशेषकर तमिलनाडु में, इसे 'पोंगल' के रूप में चार दिनों तक मनाया जाता है। भोगी पोंगल: पहले दिन पुरानी वस्तुओं को जलाकर नई शुरुआत की जाती है। सूर्य पोंगल: दूसरे दिन नए बर्तन में चावल, दूध और गुड़ से 'पोंगल' नामक व्यंजन बनाया जाता है और सूर्य देव को अर्पित किया जाता है। मट्टू पोंगल: तीसरे दिन कृषि में सहायक बैलों और गायों की पूजा की जाती है। कानुम पोंगल: चौथे दिन परिवार के लोग मिलकर खुशियां मनाते हैं।

2. उत्तरायण और पतंग महोत्सव (गुजरात)

गुजरात में मकर संक्रांति को 'उत्तरायण' कहा जाता है। यहाँ का मुख्य आकर्षण अंतरराष्ट्रीय पतंग महोत्सव है। अहमदाबाद, सूरत और वडोदरा जैसे शहरों में आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। लोग अपनी छतों पर संगीत और ढोल-नगाड़ों के साथ पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। इस दिन 'उंधियू' (सब्जियों का मिश्रण) और 'जलेबी' खाने की परंपरा है।

3. माघ बिहू (असम)

असम में इसे 'माघ बिहू' या 'भोगली बिहू' कहा जाता है। यह फसल कटाई का उत्सव है। लोग बांस और सूखी घास से 'भेलाघर' और 'मेजी' बनाते हैं। रात में सामूहिक भोज (भोज) का आयोजन होता है और अगली सुबह मेजी को जलाकर अग्नि देव की पूजा की जाती है। यहाँ के पारंपरिक खेलों में भैंसों की लड़ाई भी शामिल होती है।

4. खिचड़ी (उत्तर प्रदेश और बिहार)

उत्तर भारत में इसे मुख्य रूप से 'खिचड़ी' के नाम से जाना जाता है। इस दिन चावल और दाल की खिचड़ी खाने और दान करने का विशेष महत्व है। प्रयागराज (इलाहाबाद) में 'माघ मेला' शुरू होता है, जहाँ लाखों लोग संगम (गंगा, यमुना और सरस्वती का मिलन स्थल) पर पवित्र डुबकी लगाते हैं।

5. मकर संक्रांति (महाराष्ट्र)

महाराष्ट्र में लोग एक-दूसरे को 'तिल-गुड़' देते हैं और कहते हैं - "तिल-गुड़ घ्या, आणि गोड-गोड बोला" (यह तिल-गुड़ लीजिए और मीठा-मीठा बोलिए)। यह छोटे-छोटे मतभेदों को मिटाकर मधुर संबंध बनाने का प्रतीक है। महिलाएं 'हल्दी-कुंकुम' का आयोजन करती हैं और एक-दूसरे को उपहार देती हैं।

6. लोहड़ी (पंजाब और हरियाणा)

मकर संक्रांति से एक दिन पहले पंजाब और हरियाणा में 'लोहड़ी' मनाई जाती है। रात के समय आग जलाई जाती है और उसमें रेवड़ी, मूंगफली और मक्का डाला जाता है। लोग आग के चारों ओर भांगड़ा और गिद्दा करते हैं।

मकर संक्रांति की मुख्य परंपराएं और रीति-रिवाज

1. पवित्र स्नान (गंगा स्नान)

इस दिन नदियों में स्नान करना सबसे महत्वपूर्ण अनुष्ठान माना जाता है। विशेष रूप से गंगा, यमुना, गोदावरी, कृष्णा और कावेरी जैसी नदियों में स्नान करने से पापों का नाश होता है। कुंभ मेला और माघ मेला इसी समय के दौरान आयोजित होते हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक जमावड़ों में से एक हैं।

2. दान-पुण्य (दान का महत्व)

मकर संक्रांति को दान का महापर्व भी कहा जाता है। लोग अनाज, तिल, गुड़, कंबल और वस्त्र गरीबों को दान करते हैं। माना जाता है कि इस दिन किया गया दान सौ गुना होकर वापस मिलता है। 'गुप्त दान' की भी इस दिन काफी महिमा है।

3. तिल और गुड़ का उपयोग

सर्दियों के मौसम में तिल और गुड़ का सेवन स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक होता है। तिल में गर्मी प्रदान करने वाले गुण होते हैं और गुड़ ऊर्जा का स्रोत है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से भी, यह शरीर को ठंड से बचाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मदद करता है। तिल के लड्डू, गजक और चिक्की इस त्योहार के मुख्य व्यंजन हैं।

4. पतंगबाजी

पतंग उड़ाना केवल एक खेल नहीं है, बल्कि यह सूर्य के प्रकाश में समय बिताने का एक तरीका है। सुबह की धूप विटामिन-डी का अच्छा स्रोत होती है, जो सर्दियों में त्वचा और हड्डियों के लिए फायदेमंद है। पतंग उड़ाना खुशी और ऊँची उड़ान भरने की मानवीय आकांक्षा को भी दर्शाता है।

5. गौ पूजन और पशु प्रेम

ग्रामीण भारत में, यह त्योहार पशुओं के प्रति सम्मान व्यक्त करने का दिन है। खेती में मदद करने वाले बैलों को सजाया जाता है, उन्हें नहलाया जाता है और विशेष भोजन खिलाया जाता है। यह मनुष्य और प्रकृति के बीच के गहरे संबंध को दर्शाता है।

खान-पान और व्यंजन

मकर संक्रांति का त्योहार स्वादिष्ट पकवानों के बिना अधूरा है। भारत के हर क्षेत्र में इस दिन कुछ खास बनाया जाता है: तिल-गुड़ के लड्डू: पूरे भारत में लोकप्रिय। खिचड़ी: दाल, चावल, घी और सब्जियों से बनी, जो सुपाच्य और पौष्टिक होती है। पौष पार्वण (बंगाल): यहाँ विभिन्न प्रकार के 'पीठे' (चावल के आटे से बने पकवान) और 'पातिशप्ता' बनाया जाता है। उंधियू (गुजरात): एक विशेष मसालेदार सब्जी जो जमीन के अंदर पकने वाली सब्जियों से बनाई जाती है। पायसम (दक्षिण भारत): चावल और दूध की मीठी खीर।

पर्यटकों और आगंतुकों के लिए व्यावहारिक जानकारी

यदि आप 2026 में मकर संक्रांति के दौरान भारत की यात्रा करने की योजना बना रहे हैं, तो यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

कहाँ जाएं?

हरिद्वार और वाराणसी: यदि आप आध्यात्मिक अनुभव और गंगा आरती देखना चाहते हैं। अहमदाबाद (गुजरात): यदि आप रंगीन पतंगों और जीवंत पतंगबाजी उत्सव का हिस्सा बनना चाहते हैं। मैसूर (कर्नाटक): यहाँ हाथियों और बैलों का भव्य जुलूस देखना एक अनूठा अनुभव है। गंगासागर (पश्चिम बंगाल): यहाँ का विशाल मेला और समुद्र-संगम स्नान का दृश्य अविस्मरणीय होता है।

क्या अपेक्षा करें?

भीड़: प्रमुख धार्मिक स्थलों और नदियों के तटों पर भारी भीड़ की उम्मीद करें। अपनी सुरक्षा और सामान का ध्यान रखें। बाजार: इस दौरान बाजार तिल-गुड़ की मिठाइयों, रंगीन पतंगों और हस्तशिल्प की वस्तुओं से सजे होते हैं। मौसम: जनवरी के मध्य में उत्तर भारत में ठंड होती है, जबकि दक्षिण और पश्चिम भारत में मौसम सुहावना और हल्का गर्म होता है। ऊनी कपड़े साथ रखना उचित होगा। परिवहन: त्योहार के कारण ट्रेनों और बसों में काफी भीड़ हो सकती है, इसलिए अपनी बुकिंग पहले से कर लें।

सुरक्षा और सावधानी

पतंगबाजी के दौरान इस्तेमाल होने वाले धागे (मांझा) से सावधान रहें, क्योंकि यह पक्षियों और कभी-कभी राहगीरों के लिए खतरनाक हो सकता है। नदियों में स्नान करते समय प्रशासन द्वारा निर्धारित सीमाओं का पालन करें। गहरे पानी में जाने से बचें। स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें और मंदिरों में प्रवेश करते समय शालीन कपड़े पहनें।

सार्वजनिक अवकाश और सरकारी स्थिति

मकर संक्रांति भारत में एक 'प्रतिबंधित अवकाश' (Restricted Holiday) की श्रेणी में आता है। हालाँकि, यह पूरे देश में एक अनिवार्य राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, लेकिन कई राज्यों में इस दिन सरकारी छुट्टी घोषित की जाती है।

बैंक और कार्यालय: महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और असम जैसे राज्यों में बैंक, स्कूल और सरकारी कार्यालय इस दिन बंद रहते हैं। व्यापार: निजी क्षेत्र में भी कई कंपनियां क्षेत्रीय महत्व के आधार पर छुट्टी देती हैं।

  • बाजार: अधिकांश बाजार खुले रहते हैं और काफी व्यस्त होते हैं, लेकिन कुछ क्षेत्रों में स्थानीय दुकानदार दोपहर के समय उत्सव मनाने के लिए दुकानें बंद कर सकते हैं।
उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे राज्यों में, यद्यपि यह आधिकारिक रूप से हर जगह पूर्ण सार्वजनिक अवकाश नहीं हो सकता, लेकिन व्यावहारिक रूप से इस दिन जनजीवन धीमा हो जाता है क्योंकि लोग स्नान और पूजा में व्यस्त रहते हैं।

निष्कर्ष

मकर संक्रांति केवल एक कैलेंडर की तारीख नहीं है, बल्कि यह भारतीय चेतना का एक जीवंत हिस्सा है। यह हमें याद दिलाता है कि हम प्रकृति से जुड़े हुए हैं और हमारा अस्तित्व सूर्य, मिट्टी और जल पर निर्भर है। यह पर्व हमें सिखाता है कि जीवन में परिवर्तन अनिवार्य है और हमें हर नए बदलाव का स्वागत मिठास और सकारात्मकता के साथ करना चाहिए।

चाहे वह गुजरात के आसमान में उड़ती पतंगें हों, तमिलनाडु के घरों में उबलता पोंगल हो, या गंगा के शीतल जल में भक्तों की आस्था की डुबकी—मकर संक्रांति का हर रंग 'विविधता में एकता' के भारतीय मंत्र को चरितार्थ करता है। 2026 में, जब आप इस त्योहार को मनाएं, तो याद रखें कि यह केवल सूर्य के उत्तर की ओर जाने का जश्न नहीं है, बल्कि यह हमारे भीतर के अंधकार को मिटाकर ज्ञान के प्रकाश की ओर बढ़ने का भी संकल्प है।

शुभ मकर संक्रांति! तिल-गुड़ की मिठास और पतंगों की ऊँचाई आपके जीवन में सुख और समृद्धि लेकर आए। इस 2026 में, आइए हम सब मिलकर प्रकृति के इस उपहार का सम्मान करें और एक उज्जवल भविष्य की ओर कदम बढ़ाएं।

Frequently Asked Questions

Common questions about Makar Sankranti in India

वर्ष 2026 में मकर संक्रांति January 14, 2026 को मनाई जाएगी, जो कि Wednesday का दिन है। आज से इस पावन पर्व के लिए केवल 11 दिन शेष हैं। खगोलीय गणना के अनुसार, सूर्य दोपहर लगभग 2:49 बजे मकर राशि में प्रवेश करेगा। पूजा के लिए सबसे शुभ 'महा पुण्य काल' दोपहर 3:13 बजे से शाम 5:04 बजे तक रहेगा, हालांकि कई स्थानों पर अनुष्ठान सूर्योदय के साथ ही शुरू हो जाते हैं।

नहीं, मकर संक्रांति पूरे भारत में अनिवार्य राष्ट्रीय अवकाश नहीं है, लेकिन यह कई राज्यों में एक महत्वपूर्ण सरकारी अवकाश है। महाराष्ट्र, गुजरात, तमिलनाडु और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में, जहाँ यह त्योहार बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है, वहां स्कूल, कॉलेज और बैंक बंद रहते हैं। अन्य राज्यों में क्षेत्रीय परंपराओं के आधार पर सीमित छुट्टियां या प्रतिबंधित अवकाश हो सकते हैं। यात्रियों को सलाह दी जाती है कि वे स्थानीय अवकाश कैलेंडर की जांच करें।

मकर संक्रांति सूर्य देव को समर्पित एक प्रमुख हिंदू त्योहार है। यह सूर्य के धनु राशि से मकर राशि में प्रवेश का प्रतीक है, जिससे 'उत्तरायण' की शुरुआत होती है। यह समय सर्दियों के अंत और लंबे दिनों के आगमन का सूचक है। आध्यात्मिक रूप से, इसे अंधकार पर प्रकाश की विजय और नई शुरुआत का समय माना जाता है। वैदिक परंपराओं और गायत्री मंत्र से जुड़ा यह पर्व समृद्धि, फसल की कटाई और आध्यात्मिक नवीनीकरण का संदेश देता है।

मकर संक्रांति की विविधता इसके विभिन्न नामों में झलकती है। तमिलनाडु में इसे चार दिवसीय 'पोंगल' के रूप में मनाया जाता है, जहाँ विशेष चावल का व्यंजन बनाया जाता है। असम में इसे 'माघ बिहू' कहते हैं, जो सामुदायिक भोज और अलाव के लिए प्रसिद्ध है। गुजरात में इसे 'उत्तरायण' कहा जाता है, जहाँ आसमान पतंगों से भर जाता है। उत्तर भारत में इसे मुख्य रूप से मकर संक्रांति या खिचड़ी के रूप में मनाया जाता है, जहाँ पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है।

मकर संक्रांति के दौरान तिल और गुड़ का सेवन अनिवार्य माना जाता है। महाराष्ट्र में 'तिलगुल' के लड्डू बांटे जाते हैं और 'तिल-गुड़ घ्या, गोड-गोड बोला' कहकर भाईचारे का संदेश दिया जाता है। गुजरात में 'उंधियू' (मिश्रित सब्जी) और जलेबी प्रसिद्ध है। दक्षिण भारत में नए चावल, दूध और गुड़ से 'पोंगल' बनाया जाता है। उत्तर भारत में खिचड़ी का सेवन और दान करना अत्यंत शुभ माना जाता है। ये खाद्य पदार्थ न केवल स्वादिष्ट होते हैं, बल्कि सर्दियों के मौसम में शरीर को गर्माहट भी प्रदान करते हैं।

इस दिन लोग सूर्योदय से पहले उठकर पवित्र नदियों, विशेष रूप से गंगा, यमुना और गोदावरी में स्नान करते हैं। हरिद्वार, वाराणसी और प्रयागराज जैसे तीर्थों पर भक्तों की भारी भीड़ उमड़ती है। स्नान के बाद सूर्य देव को जल अर्पित किया जाता है और दान (दान-पुण्य) किया जाता है। लोग तिल, गुड़, कपड़े और अनाज का दान करते हैं। कई क्षेत्रों में पशुधन, विशेष रूप से बैलों और गायों की पूजा की जाती है, जो कृषि प्रधान संस्कृति और प्रकृति के प्रति कृतज्ञता को दर्शाता है।

मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाना, विशेष रूप से गुजरात और राजस्थान में, एक बहुत बड़ी परंपरा है। यह गतिविधि स्वतंत्रता, खुशी और नई ऊर्जा का प्रतीक है। वैज्ञानिक दृष्टिकोण से, पतंग उड़ाने के बहाने लोग धूप में समय बिताते हैं, जो सर्दियों के बाद शरीर को विटामिन-डी प्रदान करने में मदद करता है। आसमान में रंग-बिरंगी पतंगों के बीच होने वाली प्रतियोगिताएं सामुदायिक एकता और उत्सव के आनंद को कई गुना बढ़ा देती हैं।

यदि आप इस दौरान भारत की यात्रा कर रहे हैं, तो गुजरात के अंतरराष्ट्रीय पतंग उत्सव या गंगा के तटों पर होने वाले पवित्र स्नान का अनुभव अवश्य लें। धार्मिक स्थलों पर जाते समय शालीन कपड़े पहनें और स्थानीय रीति-रिवाजों का सम्मान करें। त्योहार के कारण बाजारों में बहुत भीड़ हो सकती है और क्षेत्रीय परिवहन प्रभावित हो सकता है, इसलिए पहले से योजना बनाएं। स्थानीय व्यंजनों का आनंद लें, लेकिन भीड़भाड़ वाली नदियों में सुरक्षा का ध्यान रखें। यह समय भारतीय संस्कृति और ग्रामीण जीवन को करीब से देखने का सबसे अच्छा अवसर है।

Historical Dates

Makar Sankranti dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Tuesday January 14, 2025
2024 Sunday January 14, 2024
2023 Saturday January 14, 2023
2022 Friday January 14, 2022
2021 Thursday January 14, 2021
2020 Wednesday January 15, 2020
2019 Tuesday January 15, 2019
2018 Sunday January 14, 2018
2017 Saturday January 14, 2017
2016 Friday January 15, 2016
2015 Thursday January 15, 2015
2014 Tuesday January 14, 2014
2013 Monday January 14, 2013
2012 Sunday January 15, 2012
2011 Saturday January 15, 2011
2010 Thursday January 14, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.