Vasant Panchami

India • January 23, 2026 • Friday

20
Days
18
Hours
07
Mins
09
Secs
until Vasant Panchami
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Vasant Panchami
Country
India
Date
January 23, 2026
Day of Week
Friday
Status
20 days away
About this Holiday
Vasant Panchami, or India’s spring festival, is a Hindu event that includes special rituals and highlights the start of spring.

About Vasant Panchami

Also known as: वसन्त पञ्चमी

वसंत पंचमी: विद्या, कला और प्रकृति के नव-उत्सव का संपूर्ण विवरण

वसंत पंचमी भारत का एक अत्यंत महत्वपूर्ण और उल्लासपूर्ण त्योहार है, जो न केवल प्रकृति के परिवर्तन का प्रतीक है, बल्कि मानवीय चेतना, ज्ञान और कला के प्रति हमारे गहरे सम्मान को भी दर्शाता है। यह पर्व माघ मास की शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है। इसे 'श्री पंचमी' या 'सरस्वती पूजा' के नाम से भी जाना जाता है। वसंत पंचमी का आगमन कड़ाके की ठंड की विदाई और सुहावने वसंत ऋतु के स्वागत का सूचक है। इस समय प्रकृति अपने सबसे सुंदर रूप में होती है; खेतों में सरसों के पीले फूल लहलहाने लगते हैं, पेड़ों पर नई कोपलें आने लगती हैं और हवा में एक नई ताजगी और सुगंध घुल जाती है।

यह त्योहार मुख्य रूप से ज्ञान, संगीत, कला और बुद्धि की देवी, माँ सरस्वती को समर्पित है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन ब्रह्मा जी के मुख से सरस्वती का प्राकट्य हुआ था। इसलिए, यह दिन विद्यार्थियों, लेखकों, कलाकारों और संगीतकारों के लिए विशेष महत्व रखता है। इस दिन चारों ओर एक आध्यात्मिक और रचनात्मक ऊर्जा का संचार होता है। लोग पीले वस्त्र धारण करते हैं, जो न केवल सरसों के फूलों का प्रतिनिधित्व करते हैं, बल्कि हिंदू धर्म में शुभता, प्रकाश और ऊर्जा का भी प्रतीक माने जाते हैं। वसंत पंचमी केवल एक धार्मिक अनुष्ठान नहीं है, बल्कि यह जीवन की जीवंतता, सीखने की निरंतरता और प्रकृति के साथ हमारे अटूट संबंध का उत्सव है।

2026 में वसंत पंचमी कब है?

वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का पावन पर्व January 23, 2026 को मनाया जाएगा। इस वर्ष यह त्योहार Friday के दिन पड़ रहा है। वर्तमान समय से इस उत्सव के आगमन में अब केवल 20 दिन शेष हैं।

हिंदू कैलेंडर के अनुसार, वसंत पंचमी की तिथि हर साल बदलती रहती है क्योंकि यह चंद्र चक्र (लूनर कैलेंडर) पर आधारित होती है। यह माघ महीने के शुक्ल पक्ष के पांचवें दिन आती है। हालांकि ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार इसकी तारीख बदलती है, लेकिन इसका आध्यात्मिक और प्राकृतिक महत्व सदैव स्थिर रहता है। वर्ष 2026 में, पंचमी तिथि 23 जनवरी की सुबह 02:28 बजे से शुरू होकर 24 जनवरी की सुबह 01:46 बजे तक रहेगी। पूजा का सबसे शुभ मुहूर्त सुबह 07:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक रहेगा, जो भक्तों के लिए साधना और अर्चना का सर्वोत्तम समय है।

वसंत पंचमी का इतिहास और पौराणिक उत्पत्ति

वसंत पंचमी की उत्पत्ति के पीछे कई रोचक कथाएं और पौराणिक संदर्भ हैं। सबसे व्यापक रूप से प्रचलित कथा सृष्टि के रचयिता भगवान ब्रह्मा और देवी सरस्वती से जुड़ी है। कहा जाता है कि जब ब्रह्मा जी ने इस सृष्टि की रचना की, तो उन्हें चारों ओर मौन और नीरसता का अनुभव हुआ। उन्हें लगा कि उनकी रचना में जीवंतता की कमी है। तब उन्होंने अपने कमंडल से जल छिड़का, जिससे एक अद्भुत देवी प्रकट हुईं। उनके चार हाथ थे; एक में वीणा, दूसरे में पुस्तक, तीसरे में माला और चौथा हाथ वरद मुद्रा में था। जैसे ही देवी ने वीणा के तारों को छेड़ा, संसार में ध्वनि और वाणी का संचार हुआ। नदियों में कल-कल की आवाज होने लगी और पक्षी चहचहाने लगे। वह दिन माघ शुक्ल पंचमी का था, इसीलिए इस दिन को सरस्वती के जन्मोत्सव के रूप में मनाया जाता है।

एक अन्य प्रसिद्ध कथा भगवान शिव और कामदेव से जुड़ी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, जब तारकासुर के अत्याचारों से देवता त्रस्त थे, तब केवल शिव का पुत्र ही उसका वध कर सकता था। लेकिन शिव गहरी समाधि में लीन थे। देवताओं के अनुरोध पर, कामदेव ने भगवान शिव की तपस्या भंग करने के लिए वसंत ऋतु का सृजन किया और उन पर फूलों का बाण चलाया। यद्यपि क्रोधित शिव ने अपनी तीसरी आंख खोलकर कामदेव को भस्म कर दिया, लेकिन इस घटना ने सृष्टि में प्रेम और सृजन की शक्ति को पुनर्जीवित किया। वसंत पंचमी का दिन इसी प्रेम और प्रकृति के पुनर्जागरण के उत्सव के रूप में भी देखा जाता है।

उत्सव और परंपरागत रीति-रिवाज

वसंत पंचमी का उत्सव भारत के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग तरीकों से मनाया जाता है, लेकिन पीला रंग और सरस्वती पूजा इसके मुख्य केंद्र बिंदु होते हैं।

  1. माँ सरस्वती की पूजा: इस दिन घरों, स्कूलों और शिक्षण संस्थानों में माँ सरस्वती की प्रतिमा या तस्वीर स्थापित की जाती है। लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते हैं और पीले वस्त्र पहनते हैं। पूजा के दौरान देवी को पीले फूल (विशेषकर गेंदा), पीले फल, केसर युक्त मिठाइयां और पीले चावल अर्पित किए जाते हैं।
  2. विद्यारंभ संस्कार: भारत में छोटे बच्चों की शिक्षा की शुरुआत करने के लिए वसंत पंचमी को सबसे शुभ दिन माना जाता है। इसे 'अक्षर अभ्यासम' या 'विद्यारंभ' कहा जाता है। इस दिन बच्चों को पहली बार वर्णमाला सिखाई जाती है या उनके हाथ से स्लेट पर पहला अक्षर लिखवाया जाता है।
  3. पुस्तकों और वाद्य यंत्रों का सम्मान: छात्र अपनी पुस्तकें, कलम और नोटबुक माँ सरस्वती के चरणों में रखते हैं ताकि वे उनकी बुद्धि को प्रखर करें। संगीतकार अपने वाद्य यंत्रों की पूजा करते हैं। मान्यता है कि इस दिन पुस्तकों को नहीं छूना चाहिए (पूजा के बाद ही), बल्कि उनका श्रद्धापूर्वक पूजन करना चाहिए।
  4. पीले रंग का महत्व: वसंत पंचमी के दिन पीले रंग का विशेष महत्व है। लोग न केवल पीले कपड़े पहनते हैं, बल्कि भोजन में भी पीले रंग के व्यंजनों को प्राथमिकता देते हैं। जैसे कि 'मीठे चावल' (केसरिया भात), 'बेसन के लड्डू', और 'केसर हलवा'। पीला रंग समृद्धि, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतीक है।
  5. पतंगबाजी: उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब और हरियाणा में, वसंत पंचमी पर पतंगबाजी की एक पुरानी परंपरा है। नीले आकाश में रंग-बिरंगी पतंगें इस उत्सव के उल्लास को और बढ़ा देती हैं।

क्षेत्रीय विविधताएं

यद्यपि यह एक अखिल भारतीय त्योहार है, लेकिन इसकी छटा हर क्षेत्र में निराली होती है:

पश्चिम बंगाल: बंगाल में इसे 'सरस्वती पूजा' के रूप में बहुत बड़े स्तर पर मनाया जाता है। पंडाल सजाए जाते हैं और ढाक की थाप पर पूजा की जाती है। स्त्रियां पारंपरिक पीली साड़ियां (बसंती साड़ियां) पहनती हैं। पूजा के अगले दिन मूर्ति विसर्जन किया जाता है। पंजाब और उत्तर भारत: यहाँ वसंत पंचमी को फसलों के त्योहार के रूप में भी देखा जाता है। खेतों में पीली सरसों लहलहाती है और लोग लोक गीतों और नृत्य के साथ खुशियां मनाते हैं। बिहार और उत्तर प्रदेश: यहाँ के मंदिरों और घरों में विशेष भजन-कीर्तन होते हैं। लोग गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करते हैं और दान-पुण्य करते हैं। दक्षिण भारत: तमिलनाडु और अन्य दक्षिणी राज्यों में इसे 'श्री पंचमी' के रूप में मनाया जाता है। यहाँ प्रकृति के नवीनीकरण पर अधिक ध्यान दिया जाता है और मंदिरों में विशेष अनुष्ठान होते हैं।

पर्यटकों और प्रतिभागियों के लिए व्यावहारिक जानकारी

यदि आप वसंत पंचमी के दौरान भारत में हैं या इस उत्सव में भाग लेना चाहते हैं, तो यहाँ कुछ महत्वपूर्ण सुझाव दिए गए हैं:

पीले वस्त्र पहनें: उत्सव का पूर्ण आनंद लेने के लिए पीले रंग के कपड़े पहनना एक अच्छा विचार है। यह आपको स्थानीय संस्कृति के साथ घुलने-मिलने में मदद करेगा। शिक्षण संस्थानों का भ्रमण: इस दिन स्कूल और कॉलेज विशेष पूजा आयोजित करते हैं। यदि संभव हो, तो किसी स्थानीय स्कूल या संगीत विद्यालय में जाकर इस पारंपरिक पूजा को देखें। वहां का वातावरण अत्यंत शांतिपूर्ण और प्रेरणादायक होता है। शाकाहारी भोजन का आनंद लें: इस दिन कई विशेष शाकाहारी और मीठे व्यंजन बनाए जाते हैं। केसरिया भात या बेसन के लड्डू चखना न भूलें। मंदिरों की यात्रा: सरस्वती माता के मंदिरों, जैसे कि तेलंगाना के बासर में 'ज्ञान सरस्वती मंदिर' या कश्मीर के शारदा पीठ (सांकेतिक रूप से) में विशेष भीड़ और रौनक रहती है। शांति से दर्शन करने के लिए सुबह जल्दी जाना उचित है। सम्मान बनाए रखें: पूजा के दौरान जूते उतारना और पवित्र वस्तुओं को न छूना अनिवार्य है। फोटोग्राफी करने से पहले अनुमति अवश्य लें।

वसंत पंचमी केवल हिंदुओं के लिए ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक रूप से उन सभी के लिए महत्वपूर्ण है जो ज्ञान और कला की सराहना करते हैं। यह दिन नई परियोजनाओं को शुरू करने, गृह प्रवेश करने या विवाह के बंधन में बंधने के लिए भी अत्यंत शुभ (अबूझ मुहूर्त) माना जाता है।

क्या वसंत पंचमी पर सार्वजनिक अवकाश होता है?

वसंत पंचमी भारत में एक 'प्रतिबंधित अवकाश' (Restricted Holiday) या 'ऐच्छिक अवकाश' की श्रेणी में आता है। इसका अर्थ यह है कि यह राष्ट्रीय स्तर पर राजपत्रित अवकाश (Gazetted Holiday) नहीं है।

स्कूल और कॉलेज: अधिकांश शिक्षण संस्थान इस दिन खुले रहते हैं क्योंकि वहां सरस्वती पूजा का आयोजन होता है। कुछ राज्यों में स्कूलों में आधे दिन की छुट्टी हो सकती है या केवल पूजा के लिए बुलाया जाता है। सरकारी और निजी कार्यालय: बैंक, सरकारी कार्यालय और व्यापारिक प्रतिष्ठान आमतौर पर सामान्य रूप से कार्य करते हैं। हालांकि, कर्मचारी अपनी इच्छानुसार इस दिन की छुट्टी ले सकते हैं। यातायात और सेवाएं: सार्वजनिक परिवहन, बाजार और अस्पताल पूरी तरह खुले रहते हैं। मंदिर के आसपास के क्षेत्रों में थोड़ी भीड़ हो सकती है, लेकिन सामान्य जनजीवन पर कोई बड़ा प्रभाव नहीं पड़ता।

निष्कर्षतः, वसंत पंचमी भारत की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक विरासत का एक सुंदर संगम है। यह हमें याद दिलाता है कि अज्ञानता के अंधकार को केवल ज्ञान के प्रकाश से ही मिटाया जा सकता है। 2026 की वसंत पंचमी आपके जीवन में नई ऊर्जा, ज्ञान और समृद्धि लेकर आए।

Frequently Asked Questions

Common questions about Vasant Panchami in India

वर्ष 2026 में वसंत पंचमी का त्योहार Friday, January 23, 2026 को मनाया जाएगा। आज की तारीख से इस पावन पर्व के आगमन में अब केवल 20 दिन शेष हैं। यह उत्सव हिंदू पंचांग के अनुसार माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है, जो वसंत ऋतु के आगमन का प्रतीक है। इस दिन मुख्य रूप से ज्ञान और कला की देवी माँ सरस्वती की पूजा की जाती है।

नहीं, वसंत पंचमी भारत में राष्ट्रीय सार्वजनिक अवकाश नहीं है। अधिकांश सरकारी कार्यालय, बैंक और व्यावसायिक संस्थान सामान्य रूप से खुले रहते हैं। हालांकि, कई स्कूल, कॉलेज और शैक्षणिक संस्थान इस दिन देवी सरस्वती के सम्मान में विशेष पूजा का आयोजन करते हैं या संक्षिप्त अवकाश रखते हैं। पश्चिम बंगाल, बिहार और उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में इसका सांस्कृतिक महत्व बहुत अधिक है, इसलिए वहां स्थानीय स्तर पर शैक्षणिक गतिविधियां प्रभावित हो सकती हैं।

वसंत पंचमी का त्योहार मुख्य रूप से विद्या, बुद्धि, कला और संगीत की देवी माँ सरस्वती के प्राकट्य दिवस के रूप में मनाया जाता है। यह पर्व वसंत ऋतु की शुरुआत का प्रतीक है और होली की तैयारियों के संकेत देता है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन देवी सरस्वती ब्रह्मांड में प्रकट हुई थीं, जिससे संसार को वाणी और ज्ञान प्राप्त हुआ। छात्र, कलाकार और विद्वान अपनी बौद्धिक और रचनात्मक प्रगति के लिए इस दिन विशेष आशीर्वाद मांगते हैं।

वसंत पंचमी में पीले रंग का अत्यधिक महत्व है क्योंकि यह रंग वसंत ऋतु, ऊर्जा और सरसों के खेतों में खिले फूलों का प्रतीक है। लोग इस दिन पीले रंग के वस्त्र पहनते हैं और देवी सरस्वती को पीले फूल अर्पित करते हैं। खाने में भी केसरिया हलवा, पीले चावल या बेसन के लड्डू जैसे पीले रंग के व्यंजनों का भोग लगाया जाता है। पीला रंग हिंदू धर्म में शुभता, प्रकाश और नई शुरुआत का प्रतिनिधित्व करता है।

इस दिन का मुख्य अनुष्ठान सरस्वती पूजा है, जो आमतौर पर सूर्योदय के बाद शुभ मुहूर्त में की जाती है। लोग जल्दी स्नान कर पीले कपड़े पहनते हैं और देवी की मूर्ति के सामने अपनी किताबें, पेन और वाद्य यंत्र रखते हैं ताकि उन्हें आशीर्वाद मिल सके। पूजा संपन्न होने तक इन वस्तुओं को छुआ नहीं जाता है। उत्तर भारत, विशेषकर पंजाब में, लोग पतंगबाजी का आनंद लेते हैं। साथ ही, कई परिवारों में छोटे बच्चों को पहली बार अक्षर लिखना सिखाया जाता है, जिसे 'विद्यारंभ' संस्कार कहा जाता है।

हाँ, वसंत पंचमी को 'अबूझ मुहूर्त' माना जाता है, जिसका अर्थ है कि यह दिन किसी भी शुभ कार्य को शुरू करने के लिए स्वयं सिद्ध मुहूर्त है। लोग इस दिन शादी-ब्याह, गृह प्रवेश, नए व्यवसाय की शुरुआत और भूमि पूजन करना बहुत भाग्यशाली मानते हैं। कृषि के दृष्टिकोण से भी यह दिन महत्वपूर्ण है क्योंकि यह फसलों के पकने और प्रकृति के पुनर्जीवन का समय होता है। शिक्षा और कला के क्षेत्र में नए कोर्स या प्रशिक्षण शुरू करने के लिए भी यह सर्वोत्तम दिन है।

भारत के अलग-अलग हिस्सों में इसके विविध रूप देखने को मिलते हैं। बंगाल और पूर्वी भारत में इसे 'सरस्वती पूजा' के रूप में बड़े पंडालों में मनाया जाता है। उत्तर भारत में, विशेष रूप से पंजाब और हरियाणा में, आकाश रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाता है। दक्षिण भारत में, जैसे कि तमिलनाडु में, इसे प्रकृति के कायाकल्प के रूप में मनाया जाता है। हालांकि मनाने के तरीके अलग हो सकते हैं, लेकिन ज्ञान की महत्ता और वसंत के स्वागत का मूल भाव पूरे देश में एक समान रहता है।

यदि आप वसंत पंचमी के दौरान भारत में हैं, तो इस उत्सव का अनुभव करने के लिए पीले रंग के कपड़े पहनना एक अच्छा विचार है। आप स्थानीय मंदिरों या शैक्षणिक संस्थानों में जाकर सरस्वती पूजा देख सकते हैं। पूजा के दौरान पवित्र वस्तुओं को न छुएं और शांति बनाए रखें। सुबह 07:15 से दोपहर 12:50 के बीच का समय पूजा देखने के लिए सबसे उपयुक्त होता है। हालांकि इस दिन कोई बड़ी बंदी नहीं होती, लेकिन मंदिरों के आसपास भीड़ और यातायात की स्थिति का ध्यान रखें।

Historical Dates

Vasant Panchami dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Sunday February 2, 2025
2024 Wednesday February 14, 2024
2023 Thursday January 26, 2023
2022 Saturday February 5, 2022
2021 Tuesday February 16, 2021
2020 Wednesday January 29, 2020
2019 Saturday February 9, 2019
2018 Monday January 22, 2018
2017 Wednesday February 1, 2017
2016 Friday February 12, 2016
2015 Saturday January 24, 2015
2014 Tuesday February 4, 2014
2013 Thursday February 14, 2013
2012 Saturday January 28, 2012
2011 Tuesday February 8, 2011
2010 Wednesday January 20, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.