Shivaji Jayanti

India • February 19, 2026 • Thursday

47
Days
18
Hours
04
Mins
39
Secs
until Shivaji Jayanti
Asia/Kolkata timezone

Holiday Details

Holiday Name
Shivaji Jayanti
Country
India
Date
February 19, 2026
Day of Week
Thursday
Status
47 days away
About this Holiday
Shivaji Jayanti is a restricted holiday in India

About Shivaji Jayanti

Also known as: शिवाजी जयंती

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती: भारतीय इतिहास का एक स्वर्णिम अध्याय

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती, जिसे 'शिवजयंती' के नाम से भी जाना जाता है, भारत के सबसे गौरवशाली और प्रेरणादायक त्योहारों में से एक है। यह दिन मराठा साम्राज्य के संस्थापक और भारतीय नौसेना के जनक माने जाने वाले महान योद्धा छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्म वर्षगांठ का प्रतीक है। शिवाजी महाराज केवल एक राजा ही नहीं थे, बल्कि वे न्याय, साहस, और स्वाभिमान के एक अमर प्रतीक थे, जिन्होंने मुगलों और अन्य विदेशी आक्रमणकारियों के अत्याचारों के विरुद्ध 'स्वराज्य' (अपना शासन) की नींव रखी।

यह दिन भारतीय जनमानस के लिए एक उत्सव से कहीं अधिक है; यह एक संकल्प दिवस है जो हमें याद दिलाता है कि कैसे सीमित संसाधनों के बावजूद, अटूट इच्छाशक्ति और बुद्धिमानी से बड़ी से बड़ी शक्तियों को परास्त किया जा सकता है। शिवाजी महाराज का जीवन और उनके आदर्श आज भी करोड़ों भारतीयों के दिलों में देशभक्ति की ज्वाला प्रज्वलित करते हैं। उनकी प्रशासनिक कुशलता, उनकी सैन्य रणनीति और उनके द्वारा स्थापित नैतिक मूल्यों ने भारतीय इतिहास को एक नई दिशा प्रदान की।

महाराष्ट्र की मिट्टी से उत्पन्न यह महानायक आज पूरे विश्व में अपने कुशल नेतृत्व और छापामार युद्ध (गनिमी कावा) की कला के लिए प्रसिद्ध है। शिवजयंती का उत्सव हमें उनके समावेशी शासन की याद दिलाता है, जहाँ जाति, धर्म या पंथ के आधार पर कोई भेदभाव नहीं था। उनके राज्य में महिलाएं सुरक्षित थीं, किसानों का सम्मान था और धर्म की रक्षा सर्वोपरि थी।

शिवाजी जयंती 2026 की महत्वपूर्ण तिथियां

वर्ष 2026 में छत्रपति शिवाजी महाराज की जन्म जयंती बड़े ही उत्साह के साथ मनाई जाएगी। इस वर्ष की तिथियां और समय इस प्रकार हैं:

दिन: Thursday दिनांक: February 19, 2026 समय: अब से केवल 47 दिन शेष हैं।

शिवाजी महाराज का जन्म ग्रेगोरियन कैलेंडर के अनुसार 19 फरवरी, 1630 को हुआ था, इसलिए हर साल 19 फरवरी को ही आधिकारिक तौर पर यह अवकाश मनाया जाता है। हालांकि, महाराष्ट्र में कई लोग हिंदू चंद्र कैलेंडर (तिथि) के अनुसार भी इस दिन को मनाते हैं, जो फाल्गुन मास के कृष्ण पक्ष की तृतीया को पड़ता है। लेकिन सरकारी और व्यापक स्तर पर 19 फरवरी ही मुख्य तिथि मानी जाती है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और उत्पत्ति

छत्रपति शिवाजी महाराज का जन्म पुणे जिले के जुन्नार शहर के पास स्थित शिवनेरी किले में हुआ था। उनके पिता शाहजी भोंसे एक शक्तिशाली सामंत थे और उनकी माता जीजाबाई एक अत्यंत विदुषी और साहसी महिला थीं। जीजाबाई ने ही शिवाजी के चरित्र निर्माण में मुख्य भूमिका निभाई, उन्हें रामायण, महाभारत की कथाएं सुनाईं और उनमें धर्म की रक्षा का भाव जगाया।

शिवाजी महाराज के समय में भारत का एक बड़ा हिस्सा दक्कन के सुल्तानों और उत्तर के मुगल साम्राज्य के अधीन था। आम जनता पर भारी कर लगाए जाते थे और धार्मिक स्वतंत्रता का अभाव था। मात्र 16 वर्ष की आयु में, शिवाजी महाराज ने तोरणा किले पर विजय प्राप्त कर स्वराज्य की शपथ ली। उन्होंने धीरे-धीरे कोंढाणा, राजगढ़ और रायगढ़ जैसे महत्वपूर्ण किलों पर कब्जा किया।

शिवाजी जयंती मनाने की परंपरा की शुरुआत के पीछे एक महत्वपूर्ण इतिहास है। इस उत्सव की पहली शुरुआत 1870 में महान समाज सुधारक महात्मा ज्योतिराव फुले ने पुणे में की थी। उन्होंने रायगढ़ किले पर शिवाजी महाराज की समाधि की खोज की और पहली बार उनकी जयंती मनाई। बाद में, 1895 में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक ने इसे एक सार्वजनिक उत्सव का रूप दिया। तिलक का उद्देश्य इस त्यौहार के माध्यम से अंग्रेजों के खिलाफ भारतीयों को एकजुट करना और उनमें राष्ट्रीयता की भावना भरना था। उन्होंने शिवाजी महाराज के साहस को एक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया ताकि युवा पीढ़ी स्वतंत्रता संग्राम में बढ़-चढ़कर हिस्सा ले सके।

शिवाजी महाराज के आदर्श और शासन व्यवस्था

शिवजी महाराज का शासन 'रैयत' (जनता) का शासन था। उनकी शासन प्रणाली उस समय के हिसाब से बहुत उन्नत थी:

  1. अष्टप्रधान मंडल: उन्होंने प्रशासन के सुचारू संचालन के लिए आठ मंत्रियों की एक परिषद बनाई थी, जिसे 'अष्टप्रधान मंडल' कहा जाता था। इसमें प्रत्येक मंत्री को विशिष्ट विभाग सौंपे गए थे।
  2. नौसेना का निर्माण: शिवाजी महाराज ने महसूस किया कि भारत के समुद्री तटों की रक्षा करना अनिवार्य है। उन्होंने कोंकण तट पर एक शक्तिशाली नौसेना का निर्माण किया और सिंधुदुर्ग, विजयदुर्ग जैसे जल-दुर्गों (समुद्री किलों) का निर्माण कराया। इसी कारण उन्हें 'भारतीय नौसेना का पिता' कहा जाता है।
  3. छापामार युद्ध (Guerrilla Warfare): शिवाजी महाराज ने दक्कन की भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए 'गनिमी कावा' की रणनीति अपनाई। कम सेना होने के बावजूद, वे अचानक हमला करके और पहाड़ों में छिपकर शक्तिशाली मुगलों को धूल चटा देते थे।
  4. स्वराज्य और न्याय: उनके राज्य में किसी भी निर्दोष को दंड नहीं दिया जाता था। उन्होंने भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त नियम बनाए थे और किसानों को बीज व कर्ज की सुविधाएं प्रदान की थीं।
  5. धार्मिक सहिष्णुता: शिवाजी महाराज हिंदू धर्म के रक्षक थे, लेकिन वे अन्य धर्मों के प्रति भी अत्यंत सम्मान रखते थे। उनकी सेना में कई मुस्लिम अधिकारी उच्च पदों पर आसीन थे। उन्होंने कभी भी किसी मस्जिद को नुकसान नहीं पहुँचाया और युद्ध के दौरान कुरान मिलने पर उसे सम्मानपूर्वक वापस कर दिया जाता था।

उत्सव और परंपराएं: कैसे मनाई जाती है शिवजयंती?

भारत में, विशेषकर महाराष्ट्र में, शिवाजी जयंती का उत्सव किसी महापर्व की तरह होता है। इसकी तैयारियां हफ्तों पहले से ही शुरू हो जाती हैं।

1. भव्य शोभायात्रा (Processions)

इस दिन की सबसे मुख्य विशेषता है 'पालकी' और भव्य शोभायात्राएं। लोग पारंपरिक वेशभूषा पहनते हैं। पुरुष धोती, कुर्ता और भगवा साफा (फेटा) पहनते हैं, जबकि महिलाएं नौवारी साड़ी पहनती हैं। इन यात्राओं में शिवाजी महाराज की प्रतिमा को सजाया जाता है और "जय भवानी, जय शिवाजी" के नारों से पूरा वातावरण गूंज उठता है।

2. किलों की यात्रा (Fort Visits)

शिवाजी महाराज के जीवन में किलों का बहुत महत्व था। इस दिन हजारों लोग शिवनेरी, रायगढ़, प्रतापगढ़, सिंहगढ़ और पन्हाला जैसे किलों पर जाते हैं। वहां दीप जलाए जाते हैं और महाराज को श्रद्धांजलि अर्पित की जाती है। शिवनेरी किले पर, जहाँ उनका जन्म हुआ था, एक विशेष पालकी समारोह आयोजित किया जाता है।

3. सांस्कृतिक कार्यक्रम

स्कूलों, कॉलेजों और सार्वजनिक चौराहों पर कई सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। इसमें शिवाजी महाराज के जीवन पर आधारित नाटक, 'पोवाड़ा' (वीर रस के गीत) गायन और भाषण प्रतियोगिताएं शामिल होती हैं। 'पोवाड़ा' मराठा लोक संगीत की एक शैली है जो महाराज की वीरता की कहानियों को बयां करती है।

4. शस्त्र प्रदर्शन और मार्शल आर्ट्स

मराठा इतिहास में 'मर्दानी खेल' (पारंपरिक युद्ध कला) का बहुत महत्व है। शिवजयंती के अवसर पर लाठी-काठी, तलवारबाजी और दांडपट्टा जैसे पारंपरिक शस्त्रों का प्रदर्शन किया जाता है। यह युवाओं को शारीरिक शक्ति और अनुशासन की प्रेरणा देता है।

5. सामाजिक सेवा

शिवाजी महाराज के कल्याणकारी आदर्शों का पालन करते हुए, कई संगठन इस दिन रक्तदान शिविर, अन्नदान (भोजन वितरण) और गरीबों की सहायता के कार्यक्रम आयोजित करते हैं। कई जगहों पर वृक्षारोपण अभियान भी चलाए जाते हैं।

6. सजावट और रोशनाई

पूरे महाराष्ट्र के शहरों और गांवों को भगवा झंडों से सजाया जाता है। शाम के समय शिवाजी महाराज की मूर्तियों के पास दीपक जलाए जाते हैं और आतिशबाजी की जाती है। घरों के बाहर सुंदर रंगोलियां बनाई जाती हैं।

शिवाजी महाराज के किलों का महत्व

छत्रपति शिवाजी महाराज ने अपने जीवनकाल में लगभग 300 से अधिक किलों पर नियंत्रण रखा या उनका निर्माण कराया। उनके लिए किला केवल पत्थर की दीवार नहीं, बल्कि स्वराज्य की सुरक्षा का कवच था।

शिवनेरी किला: यहाँ महाराज का जन्म हुआ। यह किला अपनी अभेद्य सुरक्षा के लिए जाना जाता है। रायगढ़ किला: यह मराठा साम्राज्य की राजधानी थी। यहीं पर 1674 में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक हुआ और उन्होंने 'छत्रपति' की उपाधि धारण की। प्रतापगढ़ किला: यहाँ शिवाजी महाराज और बीजापुर के सेनापति अफजल खान के बीच ऐतिहासिक युद्ध हुआ था, जिसमें महाराज ने अपनी चतुराई से अफजल खान का वध किया था। सिंधुदुर्ग किला: यह समुद्र के बीच बना एक चमत्कार है, जो महाराज की दूरदर्शिता और नौसैनिक शक्ति का प्रमाण है।

आधुनिक युग में शिवजयंती की प्रासंगिकता

आज के दौर में शिवाजी महाराज के विचार और भी महत्वपूर्ण हो गए हैं। उनका प्रबंधन कौशल (Management Skills) आज के बिजनेस स्कूलों में पढ़ाया जाता है। उन्होंने सिखाया कि संकट के समय कैसे धैर्य बनाए रखना चाहिए और कैसे उपलब्ध संसाधनों का सर्वोत्तम उपयोग करना चाहिए।

उनका महिला सम्मान का संदेश आज के समाज के लिए अत्यंत आवश्यक है। उनके शासन में महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वालों को कठोरतम दंड दिया जाता था। उन्होंने एक ऐसा राष्ट्र बनाने का सपना देखा था जहाँ हर नागरिक गर्व और सम्मान के साथ जी सके।

सार्वजनिक अवकाश और व्यावहारिक जानकारी

शिवाजी जयंती के अवसर पर महाराष्ट्र राज्य में सार्वजनिक अवकाश रहता है।

सरकारी कार्यालय और स्कूल: महाराष्ट्र में सभी राज्य सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और विश्वविद्यालय इस दिन बंद रहते हैं। बैंक और व्यवसाय: बैंक भी इस दिन बंद रहते हैं। अधिकांश निजी कार्यालय और व्यापारिक संस्थान भी इस दिन छुट्टी रखते हैं ताकि कर्मचारी उत्सव में भाग ले सकें। परिवहन: सार्वजनिक परिवहन (बसें और ट्रेनें) चालू रहती हैं, लेकिन जुलूसों के कारण कुछ मुख्य सड़कों पर यातायात प्रभावित हो सकता है। यदि आप इस दौरान महाराष्ट्र की यात्रा कर रहे हैं, तो सड़क मार्ग पर लगने वाली भीड़ को ध्यान में रखें।

  • अन्य राज्य: महाराष्ट्र के बाहर, जैसे कर्नाटक, गोवा और मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में, जहाँ मराठी भाषी आबादी अधिक है, वहाँ भी यह दिन बड़े उत्साह से मनाया जाता है, हालांकि वहां यह अनिवार्य सार्वजनिक अवकाश नहीं हो सकता है।

निष्कर्ष

छत्रपति शिवाजी महाराज जयंती केवल एक व्यक्ति की जयंती नहीं है, बल्कि यह अन्याय के विरुद्ध न्याय की जीत, गुलामी के विरुद्ध स्वतंत्रता की पुकार और अधर्म के विरुद्ध धर्म की स्थापना का उत्सव है। शिवाजी महाराज ने हमें सिखाया कि ऊंचे सपने देखने चाहिए और उन्हें पूरा करने के लिए जी-जान लगा देनी चाहिए।

2026 की शिवजयंती हमें फिर से यह अवसर प्रदान करेगी कि हम उनके महान जीवन से सीख लें और एक बेहतर, न्यायपूर्ण और सशक्त समाज के निर्माण में अपना योगदान दें। शिवाजी महाराज का नाम लेते ही रगों में जो उत्साह दौड़ता है, वही उनकी सबसे बड़ी विरासत है।

"निश्चयाचा महामेरू, बहुत जनांसी आधारू, अखंडस्थितीचा निर्धारू, श्रीमंत योगी।" (निश्चय का महान पर्वत, बहुतों का आधार, अखंड स्थिति का संकल्प लेने वाले, वह श्रीमंत योगी शिवाजी महाराज थे।)

जय भवानी, जय शिवाजी!

Frequently Asked Questions

Common questions about Shivaji Jayanti in India

वर्ष 2026 में, छत्रपति शिवाजी महाराज की जयंती February 19, 2026 को मनाई जाएगी। यह दिन Thursday को पड़ेगा। वर्तमान तिथि से इस महान उत्सव के लिए 47 दिन शेष हैं। यह दिन मराठा साम्राज्य के संस्थापक की 396वीं जन्म वर्षगांठ का प्रतीक है, जिनका जन्म 1630 में शिवनेरी किले में हुआ था।

हाँ, शिवाजी जयंती महाराष्ट्र राज्य में एक आधिकारिक सार्वजनिक अवकाश है। इस दिन महाराष्ट्र में सभी सरकारी कार्यालय, स्कूल, कॉलेज और अधिकांश व्यवसाय बंद रहते हैं। भारत के अन्य राज्यों में, यह एक वैकल्पिक या प्रतिबंधित अवकाश के रूप में मनाया जा सकता है, जहाँ व्यक्ति अपनी पसंद के अनुसार छुट्टी ले सकते हैं। यह अवकाश लोगों को अपने महान नायक के सम्मान में आयोजित विभिन्न सांस्कृतिक कार्यक्रमों में भाग लेने का अवसर प्रदान करता है।

शिवाजी जयंती छत्रपति शिवाजी महाराज के साहस, नेतृत्व और दमन के विरुद्ध प्रतिरोध का सम्मान करने के लिए मनाई जाती है। इस उत्सव की शुरुआत सबसे पहले 1895 में पुणे में महात्मा ज्योतिराव फुले द्वारा की गई थी और बाद में लोकमान्य बाल गंगाधर तिलक द्वारा इसे लोकप्रिय बनाया गया। तिलक ने ब्रिटिश शासन के दौरान भारतीयों में एकता, देशभक्ति और सांस्कृतिक गौरव की भावना जगाने के लिए इस दिन का उपयोग एक शक्तिशाली माध्यम के रूप में किया था।

शिवाजी जयंती का उत्सव विशेष रूप से महाराष्ट्र में बहुत भव्य होता है। लोग शिवाजी महाराज की प्रतिमाओं को फूलों से सजाते हैं और बड़े उत्साह के साथ जुलूस और परेड निकालते हैं। स्कूलों और कॉलेजों में नाटक, भाषण, निबंध प्रतियोगिताओं और सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाता है। ग्रामीण क्षेत्रों में लोक गीत और पारंपरिक नृत्य प्रस्तुत किए जाते हैं। इसके अलावा, कई लोग इस दिन भोजन और कपड़े दान करने जैसे सामाजिक सेवा के कार्यों में भी संलग्न होते हैं।

पर्यटकों और भक्तों के लिए, शिवनेरी किला (शिवाजी महाराज का जन्मस्थान) और रायगढ़ किला (जहाँ उनका राज्याभिषेक हुआ था) की यात्रा करना सबसे अच्छा है। इन ऐतिहासिक स्थलों पर इस दिन विशेष समारोह आयोजित किए जाते हैं। इसके अलावा, मुंबई और पुणे जैसे शहरों में भव्य शोभायात्राएं और सांस्कृतिक प्रदर्शन देखने को मिलते हैं। किलों पर जाने से शिवाजी महाराज की रणनीतिक सूझबूझ और उनकी वास्तुकला की विरासत को करीब से समझने का मौका मिलता है।

शिवाजी महाराज का शासन न्याय, समावेशी शासन और धार्मिक सद्भाव के सिद्धांतों पर आधारित था। उन्होंने 'स्वराज्य' या स्वशासन की अवधारणा पेश की, जिसका उद्देश्य आम लोगों का कल्याण था। उन्होंने अपनी सेना में सभी जातियों और धर्मों के लोगों को समान अवसर दिए और महिलाओं के सम्मान की रक्षा के लिए कड़े नियम बनाए। उनके ये आदर्श आज भी भारतीय राजनीति और समाज के लिए प्रेरणा के स्रोत बने हुए हैं।

शिवाजी महाराज को 'गुरिल्ला युद्ध' (गनिमी कावा) का जनक माना जाता है। उन्होंने अपनी भौगोलिक स्थिति का लाभ उठाते हुए छोटी सेना के साथ बड़े साम्राज्यों को चुनौती दी। उन्होंने सामरिक रक्षा के लिए 300 से अधिक किलों का निर्माण और जीर्णोद्धार किया। उनकी नौसैनिक शक्ति के प्रति दूरदर्शिता ने उन्हें 'भारतीय नौसेना का जनक' भी बनाया। शिवाजी जयंती पर उनकी इन सैन्य नवाचारों और रणनीतिक कौशल को विशेष रूप से याद किया जाता है।

यदि आप शिवाजी जयंती के दौरान महाराष्ट्र की यात्रा कर रहे हैं, तो पारंपरिक मराठी वेशभूषा पहनना और स्थानीय जुलूसों का हिस्सा बनना एक यादगार अनुभव हो सकता है। भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में सुरक्षा का ध्यान रखें और स्थानीय परिवहन के लिए पहले से योजना बनाएं क्योंकि कई रास्तों पर जुलूस के कारण मार्ग परिवर्तन हो सकता है। किलों की चढ़ाई के लिए आरामदायक जूते पहनें और पानी साथ रखें। स्थानीय लोगों के साथ सम्मानपूर्वक व्यवहार करें और इस महान उत्सव की सांस्कृतिक गरिमा को बनाए रखें।

Historical Dates

Shivaji Jayanti dates in India from 2010 to 2025

Year Day of Week Date
2025 Wednesday February 19, 2025
2024 Monday February 19, 2024
2023 Sunday February 19, 2023
2022 Saturday February 19, 2022
2021 Friday February 19, 2021
2020 Wednesday February 19, 2020
2019 Tuesday February 19, 2019
2018 Monday February 19, 2018
2017 Sunday February 19, 2017
2016 Friday February 19, 2016
2015 Thursday February 19, 2015
2014 Wednesday February 19, 2014
2013 Tuesday February 19, 2013
2012 Sunday February 19, 2012
2011 Saturday February 19, 2011
2010 Friday February 19, 2010

Note: Holiday dates may vary. Some holidays follow lunar calendars or have different observance dates. Purple indicates weekends.